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वर्ष 2026-2027 के केंद्रीय बजट की मुख्‍य बातें

 

azadi ka amrit mahotsav

वर्ष 2026-2027 के केंद्रीय बजट की मुख्‍य बातें


भाग – 1

केंद्रीय वित्‍त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने आज संसद में वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट प्रस्‍तुत किया। बजट की मुख्‍य बातें इस प्रकार हैं:-

कर्तव्‍य भवन में तैयार किया गया पहला बजट तीन कर्तव्‍यों से प्रेरित है:-

  1. पहला कर्तव्‍य – उत्‍पादकता और प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने  तथा वैश्विक उथल-पुथल के परिदृश्‍य में लचीलापन लाकर आर्थिक विकास को तेज करना और उसकी गति बनाए रखना

  2. दूसरा कर्तव्‍य- भारत की समृद्धि के पथ में सशक्‍त साझेदार बनाने के लिए लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और उनकी क्षमता बढ़ाना।

  3. तीसरा कर्तव्‍य - सरकार की सबका साथ, सबका विकास के दृष्टिकोण के अनुकूल- यह सुनिश्चित करना कि सार्थक भागीदारी के लिए प्रत्‍येक परिवार, समुदाय और क्षेत्र की संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच उपलब्‍ध हो।

  4. बजट अनुमान

  5. गैर ऋण प्राप्तियां  और कुल व्‍यय क्रमश: 36.5 लाख करोड और 53.5 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है। केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है।

  6. सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड रुपए और दिनांकित प्रतिभूतियों से शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है।

  • गैर ऋण प्राप्तियों का संशोधित अनुमान 34 लाख करोड रुपए है जिसमें से केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियाँ 26.7 लाख करोड रुपए हैं।

  • कुल व्‍यय का संशोधित अनुमान 49.6 लाख करोड रुपए है जिसका पूंजी व्‍यय करीब 26.1 लाख करोड रुपए है।

  1. बजट अनुमान 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

  2. वर्ष 2025-26  के बजट में संशोधित राजकोषीय घाटा 2025-26 के बजट अनुमान जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के समान है।

  3. ऋण से जीडीपी अनुपात संशोधित अनुमान 2025-26 में जीडीपी के 56.1 प्रतिशत की तुलना में बजट अनुमान 2026-27 में जीडीपी का 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

  4. पहला कर्तव्‍यआर्थिक विकास को तेज करना और बनाए रखना तथा छह हस्‍तक्षेपों का प्रस्‍ताव है

  • सात रणनीतिक और फ्रंटि‍यर क्षेत्रों में विनिर्माण

  1. बायोफार्मा शक्ति (ज्ञानप्रौद्योगिकी और नवाचार के जरिए स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल को बेहतर करने की रणनीतिकी घोषणा। भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केन्‍द्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्‍य से अगले पांच वर्ष के लिए दस हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ बायोफार्मा शक्ति का प्रस्‍ताव।

  • तीन नए राष्‍ट्रीय फार्मास्‍युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्‍थानों (एन.आई.पी.ई.आर.) के निर्माण तथा सात मौजूदा संस्‍थानों के उन्‍नयन के लिए बायोफार्मा केन्द्रित नेटवर्क।

  • एक हजार से अधिक मान्‍यता प्राप्‍त इंडिया क्लिनिकल ट्रायल्‍स स्‍थलों का नेटवर्क बनाया जाएगा।

  1. उपकरण और सामग्री बनाने, फुलस्‍टेक इंडिया आई.पी. डिजाइन करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए इंडिया सेमीकंडक्‍टर मिशन 2.0 शुरू किया जाएगा।

  2. अप्रैल 2025 में आरंभ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स कलपुर्जे विनिर्माण योजना को गति देने के लिए बजट बढ़ाकर चालीस हजार करोड़ रुपये करने का प्रस्‍ताव।

  3. खनन, प्रसंस्‍करण, अनुसंधान और विनिर्माण को प्रोत्‍साहन देने के लिए समर्पित दुर्लभ धातु गलियारों की स्‍थापना के उद्देश्‍य से खनिज समृद्ध ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को सहायता देने का प्रस्‍ताव।

  4. घरेलू रसायन उत्‍पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए कलस्‍टर आधारित बनाओ और चलाओ मॉडल के आधार पर तीन समर्पित कैमिकल पार्क स्‍थापित करने की योजना लाई जाएगी।

  5. पूंजी सामान क्षमता मजबूत करना

  6.  

  • डिजिटल रूप से सक्षम ऑटोमेटेड सर्विस ब्‍यूरो के रूप में दो स्‍थानों सी.पी.एस.ई. द्वारा हाईटेक टूल रूप स्‍थापित किए जाएंगे, जो उच्‍च गुणवत्‍ता के कलपुर्जों का बड़े पैमाने पर और कम लागत से स्‍थानीय स्‍तर पर डिजाइन, परीक्षण और विनिर्माण करेंगे।

  • उच्‍च मूल्‍य और प्रौद्योगिकी के लिहाज से उन्‍नत सी.आई.ई. के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए निर्माण संवर्धन और अवसंरचना उपकरण योजना(सी.आई.ई.) शुरू की जाएगी।

  • पांच वर्ष की अवधि में दस हजार करोड़ रुपये के बजट आवंटन के साथ कंटेनर विनिर्माण योजना लाने प्रस्‍ताव।

  1. वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा

  1. रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर, मानवनिर्मित फाइबर और नए जमाने के फाइबर में आत्‍मनिर्भरता के लिए राष्‍ट्रीय फाइबर योजना।

  2. मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्‍नयन और साझा परीक्षण तथा प्रमाणन केन्‍द्रों के लिए पूंजी सहायता के साथ आधुनिक पारंपरिक क्‍लस्‍टरों के लिए वस्‍त्र विस्‍तार और रोजगार योजना।

  1. चैलेंज मोड में मेगा टेक्‍सटाइल पार्क स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव

  2. खादी, हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प की मजबूती के लिए महात्‍मा गांधी ग्राम स्‍वराज पहल शुरू करने का प्रस्‍ताव। इससे देश के बुनकरों, ग्राम उद्योगों, एक जिला-एक उत्‍पाद पहल और ग्रामीण युवाओं को लाभ होगा।

  3. इससे वैश्विक बाजार संपर्क, ब्रांडिंग करने में मदद मिलेगी और प्रशिक्षण, कौशल, गुणवत्‍ता और उत्‍पादन को समर्थन मिलेगा।

 

  1. लीगेसी औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार की योजना

  • अवसंरचना और प्रौद्योगिकी उन्‍नयन के जरिए लागत स्‍पर्धा और दक्षता में सुधार के लिए दो सौ लीगेसी औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार की योजना लाने का प्रस्‍ताव।

  1. चैंपियन एस.एम.बनाना और सूक्ष्‍म उद्यमियों को समर्थन

  • एम.एस.एम.ई. को चैंपियनों के रूप में विकास करने में सहायता के लिए त्रिस्‍तरीय दृष्टिकोण- दस हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ एस.एम.ई. ग्रोथ फंड शुरू करने का प्रस्‍ताव।

  • दो हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ वर्ष 2021 में बनाए गए आत्‍मनिर्भर भारत फंड को समर्थन जारी रहेगा।

  • विशेष रूप से टीयर टू और टीयर थ्री शहरों में कॉर्पोरेट मित्र कार्डर विकसित करने के लिए आई.सी.ए.आई., आई.सी.एस.आई, आई.सी.एम.ए.आई. जैसे व्‍यवसायिक शिक्षा संस्‍थानों को सुविधा उपलब्‍ध कराई जाएगी।

  1. अवसंरचना को ठोस प्रोत्‍साहन

  • वित्‍त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजी व्‍यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा।

  • ऋणदाताओं को आंशिक ऋण गारंटी उपलब्‍ध कराने के लिए अवसंरचना जोखिम गारंटी फंड स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव।

  • समर्पित आर.ई.आई.टी. स्थापित करने के जरिए सी.पी.एस.ई. की महत्‍वपूर्ण रियल एस्‍टेट परिसंपत्तियों के पुनर्चक्रण की प्रक्रिया तेज करने का प्रस्‍ताव।

  • पूर्वी भारत में डानकूनी से पश्चिमी भारत के सूरत को जोड़ने के लिए नए समर्पित माल गलियारे बनाए जाएंगे।

  • जलचर और अंगुल जैसे खनिज समृद्ध और कलिंग नगर जैसे औद्योगिक केंद्रों को जोडने के लिए ओडिशा में एनडब्‍ल्‍यू-5 से शुरुआत के साथ अगले पांच वर्ष में 20 नए राष्‍ट्रीय जलमार्ग चालू किए जाएंगे।

  • अपेक्षित श्रम शक्ति के विकास के लिए क्षेत्रीय उत्‍कृष्‍टता केंद्रों के रूप में प्रशिक्षण संस्‍थान स्‍थापित किए जाएंगे।

  1. इनलैंड जलमार्गों और तटीय पोत परिहवन की हिस्‍सेदारी प्रतिशत से बढाकर वर्ष 2047 तक 12 प्रतिशत करने के लिए तटीय कार्गो प्रोमोशन स्‍कीम आरंभ की जाएगी।

  • सी-प्‍लेन के स्‍वदेशी निर्माण के लिए प्रोत्‍साहन दिया जाएगा और लास्‍ट माइल तथा दूरदराज क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाया जाएगा और पर्यटन को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा।

  • संचालन को समर्थन उपलब्‍ध कराने के लिए सी-प्‍लेन वी.जी.एफ. स्‍कीम शुरू की जाएगी।

  1.  

  2. दीर्घावधि ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्‍चत करना।

  • कार्बन टैक्‍चर उपयोग और भंडारण (सी.सी.यू.एस.) प्रौद्योगिकियों के लिए अगले पांच वर्ष की अवधि के लिए 20 हजार करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा।

  1. शहर आर्थिक क्षेत्रों का विकास

  • शहर आर्थिक क्षेत्र (सी.ई.आर.) के लिए पांच वर्षों की अवधि‍ के लिए पांच हजार करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा।

  • पर्यावरण अनुकूल टिकाउ यात्री प्रणाली को प्रोत्‍साहन देने के लिए मुम्‍बई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बैंगलुरू, हैदराबाद-चेन्‍नई, चेन्‍नई-बैंगलुरू, दिल्‍ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलिगुडी़ के बीच सात हाई स्‍पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।

  • वित्‍तीय स्‍थि‍रता, समावेश और उपभोक्‍ता सुरक्षा के उपाय करते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण के साथ कदम-ताल मिलाते हुए बैंकिंग क्षेत्र की व्‍यापक समीक्षा के उद्देश्‍य से ‘’विकसित भारत के लिए बैंकिंग’’ पर उच्‍च-स्‍तरीय समिति गठित करने का प्रस्‍ताव।

  • पॉवर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम के पुनर्गठन का प्रस्‍ताव।

  • भारत की उभरती आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुसार विदेशी निवेश के लिए अधिक समकालीन और उपयोक्‍ता अनुकूल रूपरेखा के लिए विदेश मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण लिखत) नियमावली की व्‍यापक समीक्षा का प्रस्‍ताव।

  • बड़े शहरों द्वारा उच्‍च मूल्‍य के म्‍यूनिसिपल बॉण्‍ड जारी करने को प्रोत्‍साहन करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का सिंगल बॉण्‍ड जारी करने पर सौ करोड़ रुपये का प्रोत्‍साहन देने का प्रस्‍ताव।

  1.  

  2. दूसरा कर्तव्‍यलोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और क्षमता बढ़ाना

  • विकसित भारत के मुख्य संचालक के रूप में सेवा क्षेत्र पर ध्‍यान केन्द्रित करने के लिए उपायों की सिफारिश करने हेतु उच्‍चाधिकार प्राप्‍त ‘शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम’ स्‍थायी समिति के गठन का प्रस्‍ताव। यह फैसला भारत को वर्ष 2047 तक दस प्रतिशत की वैश्विक हिस्‍सेदारी के साथ अग्रणी बनाएगा।

  1. विकसित भारत के लिए पेशेवर लोग तैयार करने

  • संबद्ध स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पेशवरों (ए.एच.पी.) के लिए मौजूदा संस्‍थानों का उन्‍नयन किया जाएगा  और निजी तथा सरकारी क्षेत्रों में नए ए.एच.पी. संस्‍थानों की स्‍थापना की जाएगी।

  • अगले पांच वर्ष में एक लाख ए.एच.पी. जोड़े जाएंगे।

  • वृद्धों की चिकित्‍सा और संबद्ध देखभाल सेवाओं को शामिल करते हुए मजबूत देखभाल सेवा परिवेश बनाया जाएगा। अगले कुछ वर्षों में डेढ़ लाख देखभाल सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।

  1. आयुष

  2. तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्‍थान स्‍थापित किए जाएंगे

  • प्रमाणन परिवेश के उच्‍च मानकों के लिए आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्‍नयन करने तथा अधिक कुशल कार्मिक उपलब्‍ध कराने और पारंपरिक दवाओं के लिए साक्ष्‍य आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और जागरुकता को बढ़ावा देने के लिए जामनगर में डब्‍ल्‍यू.एच.ओ. वैश्विक पारंपरिक चिकित्‍सा केन्‍द्र के उन्‍नयन का प्रस्‍ताव।

  1. पशुपालन

  • सरकार 20 हजार से अधिक पशु डॉक्‍टरों की उपलब्‍धता करेगी।

  • नि‍जी क्षेत्र में पशु रोग विशेषज्ञ और पैरा पशु शल्‍य महाविद्यालय, पशु अस्‍पताल, नैदानिक प्रयोगशालाओं और प्रजनन सुविधाओं के लिए ऋण संबद्ध पूंजी सब्सिडी सहायता योजना शुरू करने का प्रस्‍ताव।

  1. ऑरेंज इकोनॉमी

  • इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्‍नोलॉजी, मुम्‍बई को 15 हजार माध्‍यमिक विद्यालयों और पांच सौ महाविद्यालयों में ए.वी.जी.सी. कंटेंट क्रिएटर लैब (सी.सी.एल.) स्‍थापित करने में सहायता प्रदान करने का प्रस्‍ताव।

  1. शिक्षा

  • सरकार बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरीडोर के आसपास चुनौती मार्ग के माध्‍यम से पांच विश्‍वविद्यालय टाउनशिप का ‍निर्माण करने में राज्‍यों की सहायता करेगी।

  • वी.जी.एफ./पूंजीगत सहायता के माध्‍यम से प्रत्‍येक जिले में एक महिला छात्रावास की स्‍थापना की जाएगी।

  1. पर्यटन

  • मौजूदा राष्‍ट्रीय होटल प्रबंधन और केटरिंग प्रौद्योगिकी परिषद का उन्‍नयन करते हुए राष्‍ट्रीय आतिथ्‍य संस्‍थान की स्‍थापना का प्रस्‍ताव।

  • आई.आई.एम. के सहयोग से हाईब्रिड मोड में मानकीकृत, उच्‍च गुणवत्‍ता वाले 12 सप्‍ताह के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के जरिए 20 पर्यटन स्‍थलों में 10 हजार गाइडों के कौशल उन्‍नयन के लिए प्रायोगिक योजना शुरू की जाएगी।

  • सांस्कृतिक, आध्‍यात्मिक और विरासत महत्‍व वाले सभी स्‍थानों के डिजिटल दस्‍तावेज तैयार करने के लिए नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्‍थापना की जाएगी।

  1.  

  2.  

  3.  

  4. विरासत और संस्‍कृति पर्यटन

  • लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, अदिचनाल्‍लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस जैसे 15 पुरातात्विक स्‍थलों को जीवंत और अनुभवजन्‍य सांस्‍कृतिक गंतव्‍य के रूप में विकसित करने का प्रस्‍ताव।

  1. खेल

  • अगले दशक में खेल-कूद के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्‍ताव।

  1. तीसरा कर्तव्‍यसबका साथसबका विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है और इसके लिए निम्‍नलिखित चार क्षेत्रों में लक्षित प्रयास करने की आवश्‍यकता है:-

  2. किसानों की आय बढ़ाना

  • किसानों की आय बढ़ाने के लिए मत्‍स्‍य पालन, पांच सौ जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास, पशुपालन,  उच्‍च मूल्‍य वाली कृषि को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा।

  1. उच्‍च मूल्‍य कृषि

  2. सरकार उच्‍च मूल्‍य वाली फसलों की खेती समर्थन देगी जैसे:-

  • तटवर्ती इलाकों में नारियल, चंदन, कोको, काजू जैसे उच्‍च मूल्‍य वाली फसलों को सहायता प्रदान की जाएगी।

  • नारियल उत्‍पादन में प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने के लिए नारियल संवर्धन योजना का प्रस्‍ताव।

  • पूर्वोत्‍तर में अगर के पेड़ों और पर्वतीय क्षेत्रो में बादाम, अखरोट और खुमानी जैसे गिरीदार फलों को प्रोत्‍साहन दिया जाएगा।

  • वर्ष 2030 तक भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में बदलने के लिए, भारतीय काजू और कोको के लिए समर्पित कार्यक्रम का प्रस्‍ताव।

  1. भारत-विस्‍तार

  • केन्‍द्रीय बजट में भारत-विस्‍तार का प्रस्‍ताव, जो बहुभाषीय ए.आई. टूल है और जिसे ए.आई. प्रणाली सहित कृषि संबंधी प्रणालियों के लिए, आई.सी.ए.आर. पैकेज सहित एग्रीस्‍टैक पोर्टल के रूप में एकीकृत किया गया है।

  1. मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य और ट्रॉमा केयर के लिए प्रतिबद्धता

  • उत्‍तर भारत में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए निमहंस-टू की स्थापना की जाएगी।

  • रांची और तेजपुर में राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थानों का क्षेत्रीय शीर्ष संस्‍थानों के रूप में उन्‍नयन किया जाएगा।

  1. पूर्वोदय राज्‍यों और उत्‍तर-पूर्व क्षेत्र पर ध्‍यान

  • दुर्गापुर में बेहतर संपर्क नोड के साथ एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे के विकास, 5 पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में 5 पर्यटन स्‍थलों के निर्माण और 4000 ई-बसों के प्रावधान का प्रस्‍ताव।

  • अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास के लिए नई योजना।

  1. 16वां वित्‍त आयोग

  • सरकार ने 16वें वित्‍त आयोग की सिफारिश के अनुसार वित्‍त आयोग अनुदान के रूप में वित्‍त वर्ष 2026-27 के लिए राज्‍यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये उपलब्‍ध कराए।

  1.  

  2. भाग-2

  3. प्रत्‍यक्ष कर

  4. नया आय कर अधिनियम

  • नया आय कर अधिनियम, 2025, दिनांक 01 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो जाएगा।

  • सरलीकृत आय कर नियमावली और प्रपत्रों को शीघ्र ही अधिसूचित कर दिया जाएगा। नए फॉर्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि, आम नागरिक आसानी से उसका अनुपालन कर सके।

  1. जीवन जीने की सुगमता

  • किसी साधारण व्‍यक्ति को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा अधिनिर्णीत ब्‍याज को आय कर से छूट दी जाएगी और इस मद में स्रोत पर काटा गया कर देय नहीं होगा।

  1. टी.सी.एसको तार्किक बनाना

  • विदेश यात्रा कार्यक्रम पैकेज की बिक्री पर टी.सी.एस. दर को बिना किसी राशि निर्धारण के मौजूदा 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से कम करते हुए दो प्रतिशत करने का प्रस्‍ताव।

  • मानव श्रम आपूर्ति के लिए सरलीकृत टी.डी.एस. प्रावधानों से श्रम गहन कारोबारियों को लाभ होगा।

  • छोटे करदाताओं के लिए नई योजना का प्रस्‍ताव, जिसमें नियम आधारित स्‍वचालित प्रक्रिया से, कर-निर्धारण अधिकारी के समक्ष आवेदन दाखिल करने के स्‍थान पर कम अथवा शून्‍य कटौती प्रमाण-पत्र करना संभव हो सकेगा।

  • करदाताओं की सुविधा के लिए डिविडेंट, निवेश से प्रपत्र 15जी अथवा प्रपत्र 15एच स्‍वीकार करने के लिए सिंगल विंडो।

  • संशोधित रिटर्न के लिए समयसीमा मामूली शुल्‍क के भुगतान के साथ 31 दिसम्‍बर से बढ़ाकर 31 मार्च की गई।

  • कर रिटर्न फाइल करने के लिए अलग-अलग समय सीमा का प्रस्‍ताव।

  • किसी अनिवासी द्वारा अचल संपत्ति की बिक्री पर टी.डी.एस. की कटौती की जाने और टैन की आवश्‍यकता के बजाए निवासी क्रेता के पैन आधारित चालान के माध्‍यम से जमा कराए जा सकते हैं।

  • छोटे करदाताओं को अपनी विदेशी आय या संपत्ति की घोषणा के लिए एकमुश्‍त छह महीने की छूट की योजना।

  • जुर्माने और मुकद्दमेबाजी को तार्किक रूप देना।

  • आई.टी. आकलन और जुर्माने की कार्यवाही को सामान्‍य रूप से एकीकृत करने का प्रस्‍ताव है।

  • करदाताओं को अपनी पुन: आकलन कार्यवाही के बाद रिटर्न अपडेट कराने की अनुमति होगी।

  • आय का गलत विवरण देने पर अतिरिक्‍त आय कर के भुगतान के साथ छूट दी जा सकेगी।

  • आय कर अधिनियम के तहत मुकद्दमेबाजी की रूपरेखा को तार्किक बनाया गया है।

  1. सहकारिता

  • दूध, तिलहन, फल या सब्जियों की आपूर्ति में लगी प्राथमिक सहकारी संस्‍थाओं को पहले से उपलब्‍ध कटौती का विस्‍तार अब पशुचारे और बिनौले की आपूर्ति करने वालों तक भी किया गया है।

  • किसी अधिसूचित राष्‍ट्रीय सहकारी संघ द्वारा दिनांक 31 जनवरी 2026 तक कंपनियों में दिए गए उनके निवेश पर प्राप्‍त लाभांश आय पर तीन वर्ष की अवधि के लिए छूट देने का प्रस्‍ताव।

  1. भारत के विकास इंजन के रूप में आई.टीक्षेत्र को सहायता

  • सॉफ्टवेयर विकास सेवाओं, आई.टी. समर्पित सेवाओं, ज्ञान प्रक्रिया आउटसोर्सिंग सेवाओं और सॉफ्टवेयर विकास से संबंधित सेवाएं 15.5 प्रतिशत के एक समान सेफ हार्बर मार्जिन के तहत आएंगी।

  • आई.टी. सेवाओं के लिए सेफ हार्बर प्राप्‍त करने की सीमा को तीन सौ करोड़ रुपये बढ़ाकर दो हजार करोड़ रुपये किया जा रहा है।

  • ए.पी.ए. में शामिल होने वाली कम्‍पनी को उपलब्‍ध संशोधित विवरणी की सुविधा उसकी संबद्ध संस्‍थाओं को भी प्रदान की जाएगी।

  1. वैश्विक व्‍यापार और निवेश आकर्षित करना

  • किसी ऐसी विदेशी कंपनी के लिए 2047 तक कर मे रियायत दी जाएगी, जो भारत से डाटा केन्‍द्र सेवाओं का उपयोग करके वैश्विक तौर पर क्‍लाउड सेवाएं प्रदान करती है।

  • यदि, डाटा सेंटर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी संबंधित कंपनी है तो उसे लागत पर 15 प्रतिशत का सेफ हार्बर भी प्रदान किया जाएगा।

  1. कर प्रशासन

  • भारतीय लेखांकन मानक में ही आय परिकलन और प्रकटन मानकों के लिए अपेक्षाएं शामिल करने के हेतू कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय और केन्‍द्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड की संयुक्‍त समिति गठित की जाएगी। वर्ष 2027-28 से आय परिकलन और प्रकटन मानकों पर आधारित प्रथक लेखांकन अपेक्षाओं को समाप्‍त कर दिया जाएगा।

  1.  

  2. अन्‍य कर प्रस्‍ताव

  • बायबैक के कराधान में परिवर्तन को इसलिए लाया गया कि प्रवर्तकों द्वारा बायबैक रूट का अनुचित उपयोग रोका जा सके। कॉरपोरेट प्रवर्तकों के लिए प्रभावी कराधान 22 प्रतिशत और गैर-कॉरपोरेट के लिए 30 प्रतिशत होगा।

  • एल्‍कोहल युक्‍त लिकर, स्‍क्रैप और खनिजों के विक्रेताओं के लिए टीसीएस दरों को तर्कसंगत बनाते हुए 2 प्रतिशत किया जाएगा और तेंदु पत्‍ते पर 5 प्रतिशत की दर को घटाकर दो प्रतिशत किया जाएगा।

  • वायदा सौदों पर ऑप्‍शन प्रीमियम और ऑप्‍शन कार्यकलाप दोनों पर एसटीटी की मौजूदा 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर लगेगा।

  • मैट को अंतिम कर बनाए जाने का प्रस्‍ताव है, इसलिए 01 अप्रैल, 2026 से कोई और क्रेडिट संचय नहीं होगा। इस परिवर्तन के अनुरूप 15 प्रतिशत की मौजूदा मैट दर को कम करके 14 प्रतिशत किया जा रहा है।

  1. अप्रत्‍यक्ष कर :

  2. शुल्‍क सरलीकरण

  3. समुद्रीचमड़ा और वस्त्र उत्पाद

  • निर्यात हेतु सी-फूड उत्पादों के प्रसंस्करण हेतु इस्तेमाल किए गए विशेष घटकों के कर मुक्त निर्यात की सीमा को एफओबी वैल्यू के मौजूदा 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत किया जाएगा।

  • चमड़ा अथवा सिंथेटिक फूटवियर के निर्यात के लिए उपलब्ध कर मुक्त निर्यात, उसके विशेष उत्पादों के लिए भी अनुमत होगा।

ऊर्जा संक्रमण एवं सुरक्षा :

  • बैटरियों के लिए लीथियम-आयन सेलों के निर्माण हेतु इस्तेमाल में आने वाली पूंजीगत सामग्रियों के लिए मूलभूत सीमाशुल्क की छूट का विस्तार।

  • सोलर ग्लास के निर्माण में इस्तेमाल हेतु सोडियम एंटीमोनेट के आयात पर मूलभूत सीमाशूल्क से छूट मिलेगी।

न्यूक्लियर पावर:

  • न्यूक्लियर पावर परियोजनाओं के लिए आवश्यक सामग्रियों के आयात पर मौजूदा मूल-भूत सीमा शुल्क का वर्ष 2035 तक विस्तार किया जाएगा।

महत्वपूर्ण खनिज:

  • महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक पूंजीगत सामग्रियों के आयात के लिए मूल-भूत सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी।

 

बायोगैस मिश्रित सीएनजी:

  • बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क के भुगतान की गणना के समय बायोगैस के पूरे मूल्य पर छूट दी जाएगी।

असैनिक एवं रक्षा विमानन:

  • असैनिक, प्रशिक्षण एवं अन्य विमानों के निर्माण के लिए आवश्यक कलपुर्जों पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।

  • रक्षा क्षेत्र की ईकाइयों द्वारा रख-रखाव, मरम्मत अथवा अन्य आवश्यकताओं में इस्तेमाल किए जाने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण हेतु आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।

इलैक्ट्रॉनिक्स:

  • माइक्रोवेब ओवन के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले विशेष पुर्जों पर मूलभूत सीमाशुल्क में छूट दी जाएगी।

विशेष आर्थिक क्षेत्र:

  • विशेष आर्थिक क्षेत्रों से लेकर घरेलू टैरिफ क्षेत्र में पात्र विनिर्माण संयंत्रों द्वारा विक्रय की सुविधा हेतु एक विशेष एकबारगी उपाए का प्रस्ताव किया गया है, जिसके लिए रियायती दरों का प्रस्ताव किया गया है। ऐसे विक्रय की मात्रा उनके निर्यात के निर्धारित अनुपात तक सीमित होगी।

जीवन की सुगमता:

  • व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए आयात की जाने वाली सभी कर योग्य सामग्रियों पर टैरिफ दर को 20 प्रतिशत के घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा।

  • 17 दवाओं/औषधियों पर मूलभूत सीमाशूल्क में छूट दी जाएगी।

  1. अतिरिक्त असाध्य रोगों के लिए दवाओं/औषधियों के व्यक्तिगत निर्यात को कर मुक्त किया जाएगा।

  2.  

सीमा-शुल्क सरलीकरण प्रक्रिया

वस्तुओं के सुगम और त्वरित संचालन में कम से कम हस्तक्षेप

विश्वास आधारित प्रणालियां

  • एईओ के रूप में परिचित टियर 2 और टियर 3 प्राधिकृत आर्थिक प्रचालकों के लिए शुल्क स्थगन अवधि को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन किया गया है। पात्र विनिर्माणकर्ता और आयातकों के लिए भी समान शुल्क स्थगन सुविधा का प्रस्ताव।

  • सीमा शुल्कों पर बाध्यकारी अग्रिम नियम की वैधता अवधि को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष किया गया।

  • कार्गों के समाशोधन के लिए अधिमान्य व्यवहार हेतु एईओ प्रमाणन का लाभ लेने के लिए सरकारी एजेंसियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

  • जिन वस्तुओं के आयात के लिए किसी अनुपालन की आवश्यकता नहीं है, विश्वस्त आयातक द्वारा प्रवेश बिल दायर करने और वस्तुओं के आगमन पर सीमा-शुल्क को उनके समाशोधन औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अपने आप सूचना मिल जाएगी।

  • सीमा-शुल्क भंडारण,ऱ स्व-प्रकटन, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग और जोखिम आधारित लेखा-परीक्षा के साथ एक भंडार संचालक केंद्रित प्रणाली में बदला जाएगा।

 

व्यापर सुगमता

  • विभिन्न सरकारी एजेंसियों से कार्गों समाशोधन के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को इस वित्त वर्ष के अंत तक एकल और परस्पर जुड़े डिजिटल विंडो के माध्यम से निर्बाध बनाया जाएगा। 

  • खाद्य, औषधि, पौध, पशु और अन्य वन्य जीव उत्पादों, जो निषिद्ध कार्गों का 70 प्रतिशत होता है, के समाशोधन शामिल प्रक्रियाओं को अप्रैल 2026 तक संचालन रूप दिया जाएगा।

  • जिन वस्तुओं के लिए कोई अनुपालन आवश्यकता नहीं है, उन वस्तुओं को आयातक द्वारा ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करने के तत्काल बाद समाशोधित किया जाएगा।

  • सभी सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं के लिए एकल, एकीकृत और मापनीय प्लेटफॉर्म के रूप में सीमा-शुल्क एकीकृत प्रणाली 2 वर्षों में शुरु की जाएगी।

  • गैर-सन्निविष्ट स्कैनिंग और उन्नत इमेजिंग तथा जोखिम आकलन हेतु एआई प्रौद्योगिकी उपयोग सभी प्रमुख पत्तनों में कंटेनर को स्कैन करने के उद्देश्य से चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

 

निर्यात के नए अवसर

  • विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा बीच समुद्र में मछ्ली पकड़ने वाले भारतीय नौकाओं द्वारा पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त किया जाएगा। विदेशी पत्तन पर ऐसी मछली के उतराई को निर्यात वस्तु के रूप में माना जाएगा।

  • ई-कॉमर्स के माध्यम से वैश्विक बाजार में पहुंच के लिए भारत के छोटे व्यवसाय, कारीगरों और स्टार्टअप की आकांक्षाओं को सहायता प्रदान करने के लिए कुरियर निर्यात प्रति खेप 10 लाक रुपए की वर्तमान मूल्य सीमा को पूरी तरफ से हटाया जाएगा।

  • अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान सामान निकासी से जुड़े प्रावधानों के संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। संशोधित नियमों से वर्तमान समय की यात्रा संबंधी वास्तविकताओं के अनुरूप शुल्क मुक्त भत्ते में वृद्धि होगी।

  1. सभी बकायों का भुगतान करके विवादों का समाधान चाहने वाले ईमानदार करदाता अतिरिक्त राशि का भुगतान करके अपने मामले बंद कर सकेंगे।

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एनबी/एमजी/केसी/हिन्‍दी इकाई 


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